उत्तराखंड कैबिनेट ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लाना है।

विधेयक के मुख्य बिंदु
मदरसा बोर्ड का अंत: इस विधेयक के लागू होने के बाद 1 जुलाई, 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 समाप्त हो जाएगा।
नया प्राधिकरण: मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। यह प्राधिकरण राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा।
सभी अल्पसंख्यकों को लाभ: इस नए कानून से केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को भी अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिलेगा।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार: सरकार का दावा है कि यह कदम शिक्षा में गुणवत्ता और समावेशिता को बढ़ावा देगा।
पंजीकरण और मान्यता: वर्तमान में उत्तराखंड में पंजीकृत 452 मदरसों को नए प्राधिकरण के तहत फिर से मान्यता प्राप्त करनी होगी। इसके लिए उन्हें सोसाइटी एक्ट, ट्रस्ट एक्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।
यह विधेयक उत्तराखंड को सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एक एकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया स्थापित करने वाला देश का पहला राज्य बना देगा।

